top of page

परी अपनी बच्चा टोली के साथ घर के पास वाले बगीचे में खेल रही थी। बगीचा पेड़-पौधों और झाडि़यों से भरा था। यहां पूरी टोली खूब मौज-मस्ती और धूम-धड़ाका करती थी। हर रोज स्कूल से आने के बाद परी के दोस्त सुहानी, खुशी, टिंकू, आर्य, जिया और मृदु की टोली का काम ही था, खेलो-कूदो, नाचो-गाओ, शोर मचाओ और मजे उड़ाओ। सभी बच्चे मोहल्ले के पास वाले स्कूल में पांचवीं क्लास में पढ़ते थे।  एक दिन खेलते-खेलते शाम के पांच बज गए थे। अंधेरा घिरना शुरू हो चुका था। सभी छुपन-छुपाई खेल रहे थे। अपनी-अपनी मम्मी और घरवालों की आवाज सुनकर सभी बच्चे बाहर आ गए, पर पूरी टोली में से आर्य कहीं नजर नहीं आ रहा था। सारे बच्चे उसे ढूंढ़ने और आवाजें देने लगे, पर आर्य का कोई जवाब नहीं आ रहा था। सभी सोचने लगे, ह्यमालूम नहीं आर्य कहां गया। जैसे-जैसे घरों से बच्चों को बुलाने के लिए आवाजें बढ़ने लगीं एक-एक कर सभी बच्चे कल खेलने का वादा कर घर की ओर दौड़ने लगे। सुहानी, खुशी, टिंकू, जिया और मृदु सभी घर की ओर चल दिए। परी ने सबको रोकते हुए कहा, ”नहीं, हम अभी घर नहीं जा सकते, जब तक आर्य को ढूंढ़ नहीं लेते।” सभी बच्चे आर्य को ढूंढ़ने लगे। तभी परी ने कहा, ”एक साथ ढूंढ़ने से कोई फायदा नहीं। कुछ मेरे साथ आओ और कुछ उस तरफ जाओ।” परी, खुशी और मृदु एक तरफ ढूंढ़ने चल दिए। सुहानी, जिया और टिंकू दूसरी तरफ। ढूंढ़ते-ढूंढ़ते परी को कुछ आवाजें सुनाई पड़ीं। दबी-दबी आवाजें फुसफुसाने की। परी और बच्चे डरते-डरते उस दिशा में बढ़ने लगे। अंधेरा बढ़ रहा था। बच्चों का डर भी बढ़ता जा रहा था। आवाज की दिशा में बढ़ते समय परी और उसके साथियों का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वे दबे पांव आगे बढ़ रहे थे, तभी उन्होंने दूर से एक झाड़ी में आर्य को बेहोश देखा और दो लड़कों को जिन्होंने काले कपड़ों से मुंह ढका हुआ था, उसके पास बैठा पाया। ऐसा लग रहा था कि वे अधिक अंधेरा होने के इंतजार में छुपकर बैठे थे। बच्चे झाड़ी में छिपे उन लड़कों को पहचानने की कोशिश कर रहे थे, किंतु अंधेरा होने के कारण वे उन्हें पहचान नहीं पा रहे थे। उन्हें यह भी डर लग रहा था कि कहीं वे लड़के उन्हें न देख लें। साथ-साथ उन्हें अपने मित्र आर्य की भी चिंता हो रही थी कि कहीं वे इधर-उधर हुए, तो आर्य को वे कुछ कर न दें। बच्चे घबरा रहे थे। परी ने अपने दोस्तों से कहा, ”यह हमारी परीक्षा की घड़ी है। परेशानी में दोस्तों को छोड़कर नहीं भागना चाहिए, बल्कि धैर्य और साहस से काम लेते हुए समस्या को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।” फिर परी ने कुछ सोचते हुए कहा, ”खुशी, तुम घर की तरफ जाओ और सभी को बुलाकर लाओ और मृदु तुम जिया की टोली को जाकर बताओ कि आर्य यहां पर बेहोश पड़ा है।”  इधर जिया की टोली को झाड़ी के पास एक छुपी हुई सफेद वैन दिखाई दी। वे सोचने लगे कि जब हम लोग खेलने आए थे, तब तो यहां कोई वैन नहीं थी। अब यह कहां से आ गई। तभी मृदु ने आकर जिया को सारी बातें बताईं। जिया समझ गई कि यह वैन आर्य को किडनैप करके ले जाने के लिए है। जिया और उसके साथियों ने वैन की हवा निकाल दी और परी के पास पहुंच गए। इधर अकेले खड़ी परी का डर और बढ़ता जा रहा था, लेकिन वह उन दोनों लड़कों और बेहोश पड़े आर्य पर नजर रखे हुए थी। अपने साथियों को देखकर परी का हौसला बढ़ गया। इधर ढूंढ़ते हुए आ रहे मम्मी-पापा के पास खुशी भागते हुए गई और सारी बातें बताईं। मम्मी-पापा और पड़ोसी ने पुलिस को फोन कर दिया और परी के पास पहुंच गए। उनके मम्मी-पापा ने दोनों चोरों को पकड़ लिया। तब तक पुलिस भी वहां आ गई। दोनों अपहरण कर्ताओं को पुलिस के हवाले कर दिया गया। बच्चों की सतर्कता से आर्य बच गया। सभी ने बच्चों के साहस की तारीफ की। अगले दिन यह बात आस-पास के गांवों में फैल गई। स्कूल में परी की सूझ-बूझ के लिए उसे इनाम दिया गया। पर परी ने अकेले इनाम लेने से मना कर दिया। उसने बताया कि इस इनाम के हकदार उसके सभी साथी हैं और स्टेज पर उसने अपने सभी साथियों को भी बुला लिया। प्रिंसिपल ने परी से कहा, ”आज तुम एक साथ दो परीक्षाओं में पास हो गईं।”  परी हैरानी से बोली, ”मेरी परीक्षा तो अभी हुई ही नहीं, फिर मैं पास कैसे हो गई?” उन्होंने कहा, ”तुम जीवन के दो पाठों में पास हो गई हो। एक तो ह्यसच्ची मित्रताह्ण। दूसरा स्कूल में पढ़ाया जाने वाला बहादुरी और कर्तव्य-पालन का पाठ। जब तक हम सीखे गए विषय को अपने व्यवहार में शामिल नहीं करते, तब तक वह अधूरा होता है। तुमने टीचर द्वारा पढ़ाए गए उस पाठ को जिसमें सच्चे मित्र की परिभाषा सिखाई गई थी, उसे पूरा कर दिया। तुम्हारे सभी दोस्त तुम्हारे साथ खेल रहे थे, किंतु घर से बुलावा आने पर वे घर की ओर चल दिए, किंतु तुमने उन्हें उनका कर्तव्य याद दिलाया और अपने मित्र को ढूंढ़ने के लिए कहा। तुमने घर में पड़ने वाली डांट की भी परवाह नहीं की। इसी कारण आज आर्य ठीक-ठाक है।”  घर आकर परी ने सारी बातें मम्मी को बताईं। तब मम्मी ने समझाया कि स्कूल में इम्तिहान इसलिए लिया जाता है, जिससे तुम एक अच्छे नागरिक बन पाओ।  ”क्या मतलब?” परी ने पूछा।  ”मतलब है कि आप जो कुछ भी पढ़ते या सीखते हैं, वह केवल किताबों तक ही सीमित न रह जाए, बल्कि उसे व्यवहार में शामिल करना चाहिए, जो तुमने किया। तुमने ‘सच्ची मित्रता’ पाठ को केवल अपने जीवन में ही नहीं उतारा, बल्कि अपने दोस्तों को भी व्यवहार में लाने का पाठ पढ़ाया। पढ़ना तब तक व्यर्थ है, जब तक वह जीवन में न उतारा जाए। इम्तिहान केवल साधन है, जिससे टीचर यह जांचता है कि बच्चा सही दिशा में जा रहा है या नहीं। तुम जीवन के इम्तिहान में भी पास हो गईं। तुम्हारे सभी दोस्तों को सदैव एक-दूसरे से मिलकर रहने और समय पर मदद करने की सीख मिली।”  कुछ दिनों बाद परी ने देखा कि स्कूल के बाहर बहुत सारी पुलिस खड़ी है। सभी बच्चे सोच रहे थे कि न जाने ये क्यों आए हैं? प्रार्थना सभा के बाद पुलिस के बड़े अधिकारी ने बताया कि किस प्रकार परी और उसके दोस्तों के साहस और बुद्धिमानी से आर्य को बचाया जा सका साथ ही उन अपहरणकर्ताओं को पकड़वाया, जिनकी पुलिस को बहुत दिनों से तलाश थी। वे छोटे बच्चों को बड़े गिरोह में बेच देते हैं। ये गिरोह इन बच्चों से भीख मंगवाने का कार्य करवाते हैं।  प्रिंसिपल, टीचर एवं सभी बच्चे जोर-जोर से तालियां बजाने लगे। परी और उसके दोस्तों को दिल्ली पुलिस की ओर से साहसी बच्चे वाला मेडल एवं कुछ किताबें इनाम में मिलीं

 
 
 

पैसा नहीं है don’t worry बिहार स्टूडेंट credit card है ना , Dear Student – 𝐈𝐍𝐃𝐈𝐀 में किसी 𝐂𝐎𝐋𝐋𝐄𝐆𝐄𝐒 में एडमिशन लेना चाहते है तो आप एडमिशन ले सकते है बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत, बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड आपको अच्छा मौका दे रहा है , बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के द्वारा आप एडमिशन ले सकते है – 𝐏𝐎𝐋𝐘𝐓𝐄𝐂𝐇𝐍𝐈𝐂, 𝐁.𝐓𝐄𝐂𝐇, 𝐁.𝐒𝐂 𝐀𝐆𝐑𝐈𝐂𝐔𝐋𝐓𝐔𝐑𝐄, 𝐌𝐁𝐀, 𝐁𝐂𝐀/𝐁𝐁𝐀, 𝐁.𝐏𝐇𝐀𝐑𝐌𝐀 सही एक्सपर्ट से मिले अपने करियर काउंसलिंग के लिए और सही कॉलेज में एडमिशन ले। अधिक जानकारी के लिए कॉल या व्हाट्सएप मैसेज करे,, 9608026042,8877830094 Email id – jhavikash634@gmail.com

 
 
 

null

जंगल में एक पुराना महल था। उसके मुख्य द्वार के बाहर सोने का एक सांप बना हुआ था। सांप इतनी कुशलता से बनाया गया था कि जीवित लगता था। महल खंडहर बन गया था, पर सांप अभी भी चमकदार था। उधर से गुजरने वाले लोग सोने का सांप देखकर लालच में पड़ जाते। सोचते, ‘सोने का सांप बेचकर तो बहुत पैसा कमाया जा सकता है।’ लेकिन जो भी सांप की मूर्ति को उठाना चाहता, वह असफल रहता। लोग कहते थे कि उन्होंने उस महल और सांप की मूर्ति को हमेशा वैसा ही देखा था। राह चलते लोग खंडहर हुए महल में रुकते, आराम करते और अपनी राह चले जाते। महल किसने बनाया और दरवाजे पर द्वारपाल के रूप में सांप की मूर्ति क्यों बनाई गई, यह बात निश्चित रूप से कोई नहीं कह सकता था। पूछने पर पास के गांव के बड़े-बूढ़े इस बारे में एक बहुत ही विचित्र कथा सुनाते थे। कहीं एक औरत और उसका बेटा रहते थे। औरत मेहनत-मजदूरी करके अपना और अपने बेटे का पेट भरती थी। वह रोज काम पर चली जाती और बेटा घर पर रहता। बेटा अपना समय घर में अकेले बिताता। उसका नाम था जैक। वह बहुत दयालु था।  एक दिन जैक ने घर की दीवार से एक सांप को निकलते देखा। सांप धीरे-धीरे रेंगते हुए दूसरी तरफ अपने बिल में चला गया। जैक उस समय खाना खा रहा था। उसने थोड़ा सा खाना सांप के बिल के बाहर रख दिया। फिर इंतजार करने लगा कि सांप कब वहां से बाहर आता है। उस दिन से जैक ने यह नियम बना लिया। जब भी भोजन करता, सांप के लिए उसका हिस्सा जरूर रख देता था। जैक की मां ने भी यह देखा। उसने पूछा, तो जैक ने सांप के बारे में बता दिया। सुनकर मां तो डरी, पर जैक ने कहा, “मुझे सांप से जरा भी डर नहीं लगता।” एक दिन जैक ने सुना, घर की मरम्मत की जाएगी और पुरानी दीवार को तोड़ दिया जाएगा। उसने मां से कहा, “मां, दीवार को मत तोड़ो। इस तरह तो सांप बेचारा बेघर हो जाएगा।”  मां ने जैक को बहुत समझाया, पर वह तो जिद पकड़ बैठा। मां ने उसकी बात मान ली। आखिर दीवार नहीं तोड़ी गई। दिन सप्ताहों में, सप्ताह महीनों में और महीने वर्षों में बदल गए। जैक सुंदर, सजीला युवक बन गया। कुछ समय बाद जैक की मां की मृत्यु हो गई। इसलिए जैक एकदम अकेला रह गया था।  एक दिन जैक दीवार के पास खड़ा था। तभी उसने एक आवाज सुनी, “जैक, मैं तुम्हारा मित्र सांप हूं। अब तुम मेरे लिए कुछ मत रखना। मेरा अंत आ गया है। तुम बहुत अच्छे हो। मैं जाते समय तुम्हें एक मामूली भेंट देकर जाना चाहता हूं।” जैक के देखते-देखते दीवार फट गई। उसमें से एक बांसुरी बाहर गिर गई। सांप ने कहा, “यह जादुई बांसुरी संकट के समय तुम्हारी मदद करेगी। यह एक परी की है। वह इसे एक झील के किनारे भूल गई थी। मैं इसे किसी अच्छे आदमी को देना चाहता था।” जैक ने बांसुरी ले ली। तभी वह दीवार गिर पड़ी। जैक ने देखा, मलबे के बीच मरा हुआ सांप पड़ा है। जैक ने उसी दिन गांव छोड़ दिया। अब भला उसका कौन था वहां! वह हमेशा बांसुरी अपने साथ रखता था। बांसुरी की सुरीली आवाज से लोग मोहित हो जाते। जैसे बांसुरी में कोई जादू था। उसकी आवाज सुन बीमार लोग अच्छे हो जाते, दुष्टों का दिल दहलने लगता। जंगल में भटके हुए पशु लौट आते। एक बार जैक किसी गांव के समीप से गुजर रहा था। रास्ते में उसने देखा, सब खेत जले हुए हैं। उसे आश्चर्य हुआ। उसने वहां रहने वालों से पूछा। पता चला,  वहां जब-तब अंगारों की बारिश होती है। मुखिया ने बताया, “न जाने कहां से एक काला बादल आता है। उससे अंगारे बरसने लगते हैं। सारी फसल जल जाती है।” जैक मैदान में खड़ा होकर आकाश की ओर देखने लगा। तभी पश्चिम दिशा से काला बादल वहां आया। उससे अंगारे बरसने लगे। जैक ने तुरंत बांसुरी उठाई और बजाने लगा। बांसुरी की मीठी आवाज गूंज उठी। एकाएक अंगारे उछले और बादल में वापस समा गए, जैसे उन्हें किसी ने ऊपर की ओर उछाल दिया हो। सब पहले जैसा हो गया। इसके बाद बादल बड़ी जोर से गरजने लगा। फिर भयानक सूरत वाला एक बौना नीचे उतरा। उसने जैक से पूछा, “यह बांसुरी कैसे बजाते हो? तुम्हारे बांसुरी बजाने से आज भारी गड़बड़ हो गई। अंगारे धरती से उछलकर ऊपर चले गए। आज तक तो ऐसा कभी नहीं हुआ था। तुम यह बांसुरी मुझे दे दो।” जैक समझ गया कि बौना उसकी बांसुरी छीनना चाहता है। वह पीछे हटकर जोर-जोर से बांसुरी बजाने लगा। बौना पागलों की तरह उछल-कूद करने लगा। वह बुरी तरह हांफ रहा था, “बंद करो बांसुरी बजाना। मैं बहुत थक गया हूं।” जैक समझ गया कि बौना उसके चंगुल में आ चुका है। वह रुका नहीं, उसी तरह बांसुरी बजाता रहा। अब तो बौना गिड़गिड़ाने लगा, “मैं तुम्हें एक जादुई सेब देता हूं। इसे जमीन पर फेंकोगे, तो तुम्हें एक उपहार मिलेगा।” कहते-कहते उसने एक सेब जैक की तरफ लुढ़का दिया। जैक ने सेब को जोर से जमीन पर पटका, तो वहां एक शानदार महल दिखाई देने लगा। अब जैक ने कहा, “तुम्हें मैं इस तरह नहीं छोड़ सकता। तुमने इन भोले गांव वालों को बहुत परेशान किया है। तुम वादा करो कि इन्हें फिर कभी परेशान नहीं करोगे?” मरता क्या न करता? बौने ने कहा, “मैं आज के बाद कभी अंगारों की बारिश नहीं करूंगा।” जैक ने बांसुरी बजाना बंद कर दिया। बौना बादल में बैठकर भाग गया। जैक उस जादुई महल में रहने लगा। अब उसे किसी चीज की कमी नहीं रही। उसने अपने मित्र सांप की याद में सोने का सांप बनवाकर महल के बाहर लगवा दिया। इस घटना को बहुत समय बीत चुका है। न जैक रहा, न दूसरे लोग। पर जैक और सोने के सांप की कहानी आज भी जीवित है।

 
 
 
  • Original_edited
  • Watermark Small_edited

Copyright © 2023 Ramancoeducation

bottom of page
https://www.appilix.com/a/awhb7p4q